जानिये विश्व में क्यों बदनाम है र'वांडा !!

Jul 26. 2018 42 views


हमारे देश के प्रधान मंत्री मोदी जी रवांडा गए हैं, अफ्रीकी देशों के बारे में हमारी मीडिया तक बहुत कम जानकारियां आती हैं, बात रवांडा की तो रवांडा दुनिया में एक बात के लिए बदनाम है, और उस बदनामी के दाग को वो देश दुनिया क़ायम रहते नहीं मिटा सकता !

वैसे तो दुनिया में कई नरसंहार हुए हैं, लेकिन रवांडा के जातीय नरसंहार को अब तक का सबसे बड़ा नरसंहार माना जाता है, यह नरसंहार अप्रैल 1994 में हुआ था, उस समय 100 दिनों में लगभग 10 लाख लोगों की लाशें बिछ गयी थीं, रवांडा के दो समुदायों तुत्सी और हुतु के बीच हुए जातीय संघर्ष ने बड़े नरसंहार का रूप ले लिया था ! उस समय 7 अप्रैल 1994 को रवांडा के राष्ट्रपति हेबिअरिमाना और बुरंडियन राष्ट्रपति सिप्रेन की हवाई जहाज पर बोर्डिंग के समय हत्या कर दी गयी थी !

उस समय हुतु समुदाय की सरकार थी, उन्हें लगा कि इस हत्या के पीछे तुत्सी समुदाय का हाथ है, राष्ट्रपति की हत्या के दूसरे दिन ही पूरे देश में नरसंहार शुरू हो गया, ये भीषण इसलिए हुआ कि सैनिको को तुत्सी समुदाय के लोगों को मारने के आदेश दे दिया गया, और हुतु समुदाय के सैनिक भी इस नरसंहार में शामिल हो गए ! 

यह भयानक नरसंहार लगभग 100 दिनों तक चलता रहा, इस दौरान लगभग 10 लाख लोगों ने अपनी जान गँवाई ! यह हादसा इतना भयानक था कि आज भी लोग उसे याद करके डर जाते हैं, इस नरसंहार में सबसे ज्यादा शिकार महिलाओं और बच्चों का हुआ था ! 

हजारों महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था, उन्हें सेक्स स्लेव बना लिया गया, इस नरसंहार में बच्चों तक को नहीं छोड़ा गया, बच्चों को काटकर फेंक दिया गया था और तुत्सी समुदाय के लोगों को मारने के बाद उनके घरों को लूटकर घर में शवों के साथ आग लगा दी जाती थी ! उस नरसंहार में रवांडा की लगभग 20 प्रतिशत आबादी ख़त्म हो गयी थी !

सौ दिन चले इस नरसंहार में 10 लाख लोगों को मौत की घाट उतार दिया गया, यानी :-

मतलब हर रोज दस हजार लोग !
हर एक मिनट में 6 मर्दों, औरतों और बच्चों का क़त्ल !
75000 बच्चों ने अपने माँ बाप खोये !

सारे लोग गोलियों और बमों से ही नहीं मारे जाते थे. ज्यादातर को चाकू, चापड़ या डंडों से मारा गया था. मारने वालों में सिर्फ रवांडा के सैनिक ही नहीं थे, बल्कि वहां के हुतू समुदाय के लोग भी थे. 

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